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Govardhan Pooja leela in hindi भाग-2 ( गोवर्धन पूजा लीला )

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  आइये जानते है की  श्री कृष्ण ने  मेघो से ब्रज रक्षा कैसे की | जब   सारे देवता इन्द्र पास गये वह पूछने लगा कि मुझे समझा कर कहो कि कल व्रज मे किसकी पूजा थी । इसी वीच नारदजी भी आय पहुँचे तो इन्द्र से कहने लगे किं सुनो महाराज , तुम्हें सब कोई मानते हैं पर एक ब्रजवासी नहीं मानते , क्योंकि नन्द के बेटा हुआ है । उसका सब करते हैं , उन्होंने तुम्हारी पूजा बंद करके सबसे पर्वत पुजबाया है । इतनी बात के सुनते ही इन्द्र क्रोध कर बोला कि , ब्रजवासियों को धन बढा इसी बीच मे उन्हें गर्व भी हुआ है ।   इतना सुन के बाद उसने तुरंत सुरपति ने मैघपति को बुलाया  भेजा और वह स्वयं ही डरता-काँपता आ हाथ जोड खडा हुआ । उसे देखते ही इन्द्र स्नेह कर बोला कि, तुम अभी अपना दल साथ लै आओ और गोवर्धन पर्वत -समेत ब्रजमण्डल पर बरस कर ऐसा बहाओ    कि कहीँ  गिरि का चिह्न और ब्रजवासियों का नाम न रह जाय । यह आज्ञा पाते मैघपति दण्डवत् कर राजा से बिदा हुआ और उन्होंने अपने  स्थान पर आय बड़े-बड़े म...

Govardhan Pooja leela in hindi भाग-1 ( गोवर्धन पूजा लीला )

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  गोवर्धन   पूजा लीला ( Govardhan Pooja leela in hindi) आज आप इस आर्टिकल के माध्यम   गोवर्धन पूजा के बारे मै सम्पूर्ण जानकारी   बिस्तार से जानेगे , जिसमे इसके बारे मै हर एक चीज वर्णन किया गया है | जैसे श्री कृष्ण   ( Krishna ) ने गोवर्धन (Govardhan ) पर्वत को  पूजा   और इंद्र अहंकार को दूर किया |    सब बृजबासी बर्ष के कार्तिक महीने की चौदस को   नहाय धोय   केसर चन्दन से   चौक पुरांय   तरह - तरह   की मिठाई और पकवान धर, धूप दीप कर इन्द्र की   पूजा किया करे । यह रीति उनके यहाँ परम्परा से चली आती थी । एक दिन यही दिन आया तव नन्द जी के   घर वहुत सी   खानेकी सामग्री वनबाई   और ब्रजवासियों के घर   पर भी   भोजन की सामग्री तैयार हो रही थी । श्रीकृष्ण (Shree krishna ) ने   माँ से पूछा कि मैया   घर-घर   पकवान और   मिठाई बन रही है   आज   ऐसा क्या है   यशोदा (Yasoda) मैया बोलो कि, बेटा इस समय मुझे बात कहने की फु...

Varsha Ritu Krishna Leela ( वर्षा ऋतु )

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  आज हम बर्षाऋतु के बारे मै  इस कहानी के माध्यम से उस काल   Varindavan  की भूमि पर Krishna   के कैसी सुहावनी लगती थी और ग्बाल और गोपियों एक दूसरे से कितना प्रेम करते थे  और जहां नदी यमुना  किनारे सरयू चलते थे और सरोबर मै पानी की लहरे चलती थी,और जहां हंस सरश सरयू मै ऋतू का आंनद लेते थे और कोयलिया गाती  है और मोर नाचते है  वृक्ष की डालियाँ झूमती है,और पशु पक्षी किलोल कर रहे थे, वहां गोपी ग्बाल झूलों पर झूल - झूल  ऊँचे स्वरों में मल्हार गाते थे और  Krishna -बलराम जी बाल लीला कर अधिक सुख दिखाते थे इस तरह व्रर्षात्रस्तु का सभी ग्बाल बल आंनद उठाते थे,   Shree Krishna  फिर अपने सखाओं को साथ लेकर लीला करने लगे और जब तक Shree Krishan   वन में गाय चराते ,  तब तक गोपी घर मेँ बैठी हरि का यश गावें ,एक दिन Krishna   ने वन में वंसी बजाई तो वंशी ध्वनि सुनते ही सारी ब्रज-गोपियाँ भाग उठी कृष्ण  के आस पास आकर बैठ गयी और आपस मेँ कहने लगीं कि ये वंसी की ध्वनि हमें पागल कर देती है तभी गोपी कहती इस कान्हा की वंसी मै ...

Kaliya Nag Vadh

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  एक दिन Shree Krishna अपने ग्बाल कें साथ यमुना किनारे गेद खेलने लगे और जहां (शेष ) कालिया-नाग रहता था वहां चार कोस  तक Yamuna का जल उसके विष से ऐसा खौलता था कि कोई पशु-पक्षी भी वहाँ पर पानी नहीं पी सकता था । और  भूल से चला भी जाता तो  उसके बिष से  लपट से झुलस कर  गिर पड़ता था किनारे पर कोई पेड़ घास भी नहीं उपजता था । एक अविनाशी कदम्ब वृक्ष तट पर था, उस पर एक समय अमृत चोंच मेँ  लिये एक गरुड आ बैठा था, उसके मुख से एक बूंद  अमृत की उस वृक्ष पर गिर पडी थी इसलिए वह पेड़  बचा रहा था । श्री Krishna कालिया नाग को मारना का मन ठान गेद खेलते-खेलते उस कदम्ब पर जा चढे और नीचेसे सखाने गेद मारी  तो वह यमुना मेँ जा गिरी । उसके साथ कृष्ण भी कूदे । जैसे ही Shree Krish यमुना मै कूदे यह सुनकर कालिया नाग विष उगलने लगा और फुंकार मारने  लगा और कहने लगा यह कौन है, जो अब तक दह में जीता है नाग कहने लगा  कि कोई बडा पापी पक्षी आया है, जो अब  तक  मै आह होता है  और कह कर यह एक सो दस फणों से विष फैलाने लगा , Krishna तैरते फिरते ये यमुन माँ के...

Bakasur vadh

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Bakasur vadh जब Shree Krishan 5-बर्ष हुए तो माँ से कहने लगे कि माँ मै गऊ चराने जाऊँगा' तू बलदाऊ से कह दे कि मुझे वन मे ये अकेला न छोडे, माँ कहने लगी…   कन्हैया गाय बछड़े चराने वाले बहुत ग्वाला है'तो कन्हैया हट करने लगे तभी कान्हा बोले माँ मैं वन मेँ खेलने जाऊँगा तो कन्हैया के जिद करने के बाद माँ बलदाऊ और सखाओ से कहती बलराम कन्हैया का ध्यान रखना और बन मैं अकेला न होजाए , और कर कहा कि बछड़े चराने दूर मत जइयो और शाम होते ही दोनों साथ साथ जंगल से गाय लेकर घर आइयो,  तुम इसके रख वाले हो, ऐसा कह के माँ ने दोनो भाइयों को साथ मई गाय चराने जंगल मे भेज दिया। वे जाकर गोकुल मै यमुना तट पर गे ओर बछड़े चराने लगे, और ग्बाल बाल के साथ यमुना के किनारे खेलने लगे, कि इतने मेँ कंस का पठाया बकासुर आया वहां आ पहुंचा ।  उसे देखते ही सब गाय बछड़े डरकर उधऱ भागने लगे तब श्रीकृष्णजी ने बलदेब जी को नैन से जताया कि भाई यह कोई राक्षस आया है । ज्योंही आगे चलते -चलते वह घाट के निकट आ पहुँचा त्यौही श्रीकृष्णने पिछले पाँव पकढ़ फिराय ऐसा पटका कि उसका जी घट से निकल सटका ।   बकासुर को ...

3-Shree krishna makhan chori leela -1

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(Shree Krishan Makhan Chori Leela)                                     भगवान Shri Krishna ने ब्रिज मे जन्म लेने के बाद बहुत सारी अनेको लीलाये की है जिसमे से एक लीला है माखन चोरी | तो आईये जानते  है क्या है माखन चोरी Leela और भगवान श्री कृष्ण  ने kyo की माखन चोरी | तो बताना चाहूँगा भगवान shri Krishna  और बाबा नन्द के घर माखन की कोई  कमी नहीं थी उनके घर एक लाख गऊ थी पर भगवान माखन चोरी इसलिए की क्योकि ब्रिज  गोपियाँ भगवान से बहुत प्रेम करती थी और भगवान अपनी Leela के माध्यम से गोपियों को  प्रेम देना चाहते थे | भगवान श्री कृष्ण थोड़े बड़े हो जाते है तो उन्होने एक सखाओ की टोली बनायीं थी जो भगवान के साथ माखन चोरी करते थे | उनके सखा थे १ (मनुष्का) २ (दामा) ३ (तोसन) ४ (सुनकिन ) ५ (मदना) एक दिन भगवान श्री Krishna  अपने सभी सखाओ के साथ माखन चोरी की योजना बनाते है और सभी सखाओ के साथ शीला भाबी के घर पहुंच जाते है और श्री कृष्ण देखते है  शीला भाबी तो सर पर मटकी रख के पानी ल...

2-Shree Krishna killed Putna in hindi

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गोकुल मै नन्द के द्वारे बधाई चल रही थी  सभी बृजबासी कृष्ण (Krishna)  के जन्म का आनंद ले रहे और नन्द  बाबा के साथ सभी बृजबासी पालना मै  लैटे मेरे कन्हैया को झूला रहे है , और तभी योग माया ने कंस से कहा तुझे मारने बाला गोकुल मैं जन्म ले चुका है,और कंस यह सुनकर भयभीत हुआ तभी पूतना (PUTNA) को बुलाया और Mathura से गोकुल जाने का आदेश दिया और कहा कि उस बालक को उठाओ और खत्म करदो,  पूतना ने आदेश का पालन करते हुए आकाश के मार्ग से गोकुल मै एक सुन्दर नारी के भेष बनाकर  और अपने इस्तनो  पर ज़हर लगा कर  बाबा नन्द के घर (Ghar) गोकुल मै पहुँच जाती, जहां  मेरे Krishna पालना मै झूल रहे थे,माँ यसोदा से कहती मैया मे तेरे बालक को देखना चाहती हू ,माँ यशोदा पूछती हैं तू कहा रह गयी थी इतने दिनों से पूतना बोलती है मइया मै  अपने पिता के घर गयी थी ,इतना सुन कर बृजरानी माँ यशोदा krishan लाला को पूतना को दे देती,जैसे मेरे कन्हैया ने पूतना को देखा और आँख बन्ध कर ली और उसके इस्तनो से दूध का आनन्द लिए जा रहे है और PUTNA चिलाती है कि छोड़ो -छोड़ो, तभी पूतना को मेरे प्रभ...